नई दिल्ली/नगांव/मालदा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी भारत को बड़ी सौगात देते हुए असम और पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने असम के नगांव जिले में ₹6,957 करोड़ की लागत से बनने वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की आधारशिला रखी, वहीं पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन से भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
प्रधानमंत्री का यह दौरा न केवल बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास को गति देने वाला है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन, रेलवे आधुनिकीकरण और क्षेत्रीय संतुलन के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर भारत पर केंद्र सरकार का विशेष फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को प्राथमिकता दी है। सड़क, रेल, हवाई संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी और पर्यटन के क्षेत्र में लगातार बड़े निवेश किए जा रहे हैं।
असम दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि
“पूर्वोत्तर भारत अब देश के विकास का गेटवे बन रहा है। यहां की कनेक्टिविटी, संस्कृति और क्षमता भारत की प्रगति को नई दिशा दे रही है।”
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर: पर्यावरण और विकास का संतुलन
परियोजना का संक्षिप्त परिचय
असम के नगांव जिले में प्रस्तावित काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है, जिसकी कुल लागत लगभग ₹6,957 करोड़ है। यह कॉरिडोर काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से गुजरने वाले यातायात को सुव्यवस्थित करेगा और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
क्यों जरूरी था एलिवेटेड कॉरिडोर?
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान विश्व प्रसिद्ध है और यह एक सींग वाले गैंडे (One-horned Rhino) के लिए जाना जाता है। हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं, जिससे सड़क यातायात का दबाव बढ़ गया है।
अब तक:
- तेज रफ्तार वाहनों से वन्यजीवों की मौत
- जाम की समस्या
- पर्यावरणीय असंतुलन
जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।
एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से:
- वाहन जमीन से ऊपर गुजरेंगे
- वन्यजीव स्वतंत्र रूप से एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जा सकेंगे
- दुर्घटनाओं में कमी आएगी
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर की प्रमुख विशेषताएं
- कुल लागत: ₹6,957 करोड़
- आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक
- पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन
- वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मार्ग
- पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
- स्थानीय रोजगार के अवसर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि
“यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का उदाहरण बनेगी।”
असम के विकास में नई रफ्तार
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि यह असम की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
इससे होने वाले लाभ
- पर्यटन उद्योग को मजबूती
- होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय व्यापार में वृद्धि
- युवाओं के लिए रोजगार
- पूर्वोत्तर राज्यों की बेहतर कनेक्टिविटी
राज्य सरकार के अनुसार, परियोजना के निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
पश्चिम बंगाल में रेलवे इतिहास का नया अध्याय
असम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल पहुंचे, जहां उन्होंने मालदा टाउन स्टेशन से भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।
यह ट्रेन भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नई शुरुआत मानी जा रही है।
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन: क्या है खास?
अब तक वंदे भारत ट्रेनें दिन में चलने वाली चेयर-कार सेवाओं के रूप में जानी जाती थीं, लेकिन वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लंबी दूरी की रात्री यात्रा के लिए डिजाइन की गई है।
प्रमुख विशेषताएं
- आधुनिक स्लीपर कोच
- तेज रफ्तार
- आरामदायक बर्थ
- स्वदेशी तकनीक
- उन्नत सुरक्षा प्रणाली
- स्मार्ट सुविधाएं
प्रधानमंत्री ने कहा कि
“वंदे भारत स्लीपर ट्रेन देश के मध्यम वर्ग और यात्रियों को विश्वस्तरीय रेल अनुभव देगी।”
मालदा टाउन से क्यों हुआ शुभारंभ?
मालदा टाउन उत्तर बंगाल का एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है। यह बिहार, झारखंड, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
इस ट्रेन के शुभारंभ से:
- पूर्वी भारत को बेहतर रेल कनेक्टिविटी
- व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा
- यात्रियों को समय की बचत
रेलवे आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारत सरकार के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है।
भारतीय रेलवे में हो रहे बदलाव
- पुराने कोचों का आधुनिकीकरण
- हाई-स्पीड ट्रेनों का विस्तार
- स्टेशन पुनर्विकास
- डिजिटल टिकटिंग और सुरक्षा
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में भारत का रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे आधुनिक नेटवर्क में शामिल हो।
प्रधानमंत्री का संदेश: विकास सबके लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल बड़े शहरों का विकास नहीं, बल्कि देश के हर कोने तक सुविधाएं पहुंचाना है।
उन्होंने कहा:
“चाहे असम हो या बंगाल, हमारा उद्देश्य है कि हर क्षेत्र को समान अवसर मिले और हर नागरिक को बेहतर सुविधा।”
विपक्ष और स्थानीय प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज रही। जहां समर्थकों ने इसे विकास का प्रतीक बताया, वहीं विपक्ष ने इसे चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि:
- परियोजनाओं से रोजगार मिलेगा
- क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी
- कनेक्टिविटी सुधरेगी
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर इस बात का उदाहरण है कि सरकार विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है।
वन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की परियोजनाएं सही ढंग से लागू की जाएं, तो:
- वन्यजीवों की सुरक्षा संभव है
- पर्यटन और प्रकृति में संतुलन बना रह सकता है
आर्थिक दृष्टिकोण से परियोजनाओं का महत्व
इन दोनों परियोजनाओं से:
- निवेश में वृद्धि
- स्थानीय उद्योगों को लाभ
- राज्यों की GDP में योगदान
विशेषज्ञों के अनुसार, बुनियादी ढांचे में निवेश से लंबी अवधि में आर्थिक विकास को मजबूती मिलती है।
आने वाले समय में क्या उम्मीदें?
सरकार ने संकेत दिए हैं कि:
- और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें चलाई जाएंगी
- पूर्वोत्तर में नई सड़क और रेल परियोजनाएं आएंगी
- पर्यटन और लॉजिस्टिक्स पर विशेष ध्यान दिया जाएगा

